आज ( #MuktiBodh_Part1 के आगे पढ़िये ....) #MuktiBodh_Part2 ‘‘दो शब्द‘‘ संत गरीबदास जी के अमर ग्रन्थ की अमृतवाणी का सरलार्थ प्रारम्भ करने से पूर्व कुछ आवश्यक जानकारी कराना अनिवार्य समझता हूँ। श्री सद्ग्रन्थ साहेब में अधिक वाणी सन्त गरीबदास महाराज जी की हैं। सन्त गरीबदास जी का जन्म गाँव-छुड़ानी जिला-झज्जर प्रांत-हरियाणा में सन् 1717 (विक्रमी संवत् 1774) में हुआ। गाँव छुड़ानी में गरीबदास महाराज जी का नानका है। ये गाँव करौंथा (जिला-रोहतक, हरियाणा) के रहने वाले धनखड़ गोत्र के थे। इनके पिता श्री बलराम जी का विवाह गाँव छुड़ानी में श्री शिवलाल सिहाग की बेटी रानी देवी से हुआ था। श्री शिवलाल जी का कोई पुत्रा नहीं था। इसलिए श्री बलराम जी को घर-जमाई रख लिया था। गाँव छुड़ानी में रहते 12 वर्ष हो गए थे, तब सन्त गरीबदास महाराज जी का जन्म गाँव छुड़ानी में हुआ था। श्री शिवलाल जी के पास 2500 बीघा (बड़ा बीघा जो वर्तमान के बीघा से 2.75 गुणा बड़ा होता था) जमीन थी। जिसके वर्तमान में 1400 एकड़ जमीन बनती है। (2500×2×75/5 =1375 एकड़) उस सारी जमीन के वारिस श्री बलराम जी हुए तथा उनके पश्चात् उनके इकलौते पुत्...